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Saturday, September 27, 2008

Sai Baba Vrat detail Procedure for 9 Thursdays in Hindi .

Share Author: Manisha.Rautela.Bisht on 9:41 AM
Sairam dear readers ,
I have been receiving few mails on putting up Sai Vrat details on blog especially by those Sai readers who are daily visiting the blog and want everything in one place.I am putting the Vrat procedure here may Sai bless each and everyone .

A little about Vrat I would like to write.This is a Vrat of 9 Thursdays .One has to observe this Vrat for continuous 9 Thursday with the procedure that I shall be putting below in the post along with a Story or we can say Katha which when one reads increases one's devotion to observe this Vrat .

The Vrat is written by Nisha Jani in 2000 in Gujrati Language.Later with its increased demand it was published in Hindi in 2002.Though Sai Baba has never emphasized on keeping Vrat but it is devotees faith and love for Baba that they love to observe fast on Guruwar/Thursdays .By means of fasting they wish to please Baba and fulfill the desired wish or just to reflect their love for HIM .

I have been asked if I keep Vrat or not ?.Personally I have not kept 9 Vrat but from class 5th -6th I have been keeping Sai Baba's fast every Thursday till my boys were born .Due to medication I was not allowed to keep and now without any strict rule I keep when I feel I can.

Though many a time I would come across the chapter in Sai Satcharitra where Baba indicated on not keeping fast and my mind will question should I ? should I not? ,as I totally agree with Baba ,where He Says "with empty stomach and wavering mind how can one pray or concentrate on God when the mind is craving for food.?" .Hence due to sheer love and purpose of giving up one time meal to some one needy I would pick up Thursday Fast.If we do not keep fast we can surely give one time meal to any needy .This is my personal view and one can do according to one's faith and understanding of fasting.

There are many Sai devotees who are following this Vrat Procedure and have experienced its effect and Sai blessings after doing it.

I shall be giving the complete details first in Hindi and than in English .Sai Devotees can take the print outs of the procedure /Katha written below in Hindi.Here rules of fasting ,procedure and story is given .

Apart from this I would like to highlight some other points :

1.When the Vrat procedure is completed for the day, one should sing Sai Aarti in the end.

2. Offer Naivedhya to Sai Baba if you do the Vrat by taking food only one time.

3. In the end of the book its mentioned that when the Vrat is concluding ,one should give 5,11 or 21 booklets of Sai Vrat to people according to their will and financial status.For this one can take print out of this Vrat Procedure and distribute them .

Jai Sai Ram

श्री साईं बाबा व्रत के नियम


१. ये व्रत कोई भी स्त्री पुरुष और बच्चे भी कर सकते है

२. ये व्रत कोई भी जाती-पति के भेद भावः बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है

३. ये व्रत बहुत ही चमत्कारिक है ९ गुरूवार विधिपूर्वक करने से निश्चित ही इच्छित फल की प्राप्ति होती है

४. ये व्रत कोई भी गुरूवार को साईं बाबा का नाम ले कर शुरू किया जा सकता है जिस कार्य के लिए व्रत किया गया हो उसके लिये साईं बाबा से सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करनी चाहिए

५. सुबह या शाम को साईं बाबा के फोटो की पूजा करना किसी आसन पर पीला कपडा बिछा कर उस पर साईं बाबा का फोटो रख कर स्वच्छ पानी से पोछ कर चंदन या कंकु का तिलक लगाना चाहिये और उन पर पीला फूल या हार चढाना चाहिये अगरबत्ती और दीपक जलाकर साईं व्रत की कथा पढ़ना चाहिये और साईं बाबा का स्मरण करना चाहिये और प्रसाद बाटना चाहिये (प्रसाद में कोई भी फलाहार या मिठाई बाटी जा सकती है)

६. यह व्रत फलाहार लेकर किया जा सकता है (जैसे दूध, चाय, फल, मिठाई आदि) लेकर अथवा एक समय भोजन करके किया जा सकता है बिलकुल भूखे रहकर उपवास न किया जाय

७. ९ गुरूवार को हो सके तो साईं बाबा के मंदिर जाकर दर्शन किए जाए साईं बाबा के मंदिर न जा पाये तो (नजदीक मंदिर न हो) तो घर पर ही श्रद्धापूर्वक साईं बाबा की पूजा की जा सकती है

८. बहार गाव जाना हो तो भी उस वक्त व्रत चालू रखा जा सकता है

९. व्रत के समय स्त्रियों को मासिक की समस्या आए अथवा किसी कारण से व्रत न हो पाये तो उस गुरूवार को ९ गुरूवार की गिनती में न लिया जाए और उस गुरूवार के बदले अन्य गुरूवार करके ९ वे गुरूवार किया जाए

उद्यापन की विधि


१. ९ वे गुरूवार को उद्यापन करना चाहिए इसमें पांच गरीब को भोजन किया जाए (भोजन अपनी यथाशक्ति देना या करवाना)

२. साईं बाबा की महिमा एवं व्रत का फैलाव करने के लिए अपने सगे-सम्बन्धी या पडोसियों को यह किताबे ५, ११, २१ अपनी यथाशक्ति भेट दी जाए इस तरह व्रत का उद्यापन किया जाय

३. ९ वे गुरूवार को जो किताबे भेट देनी है उसका यथाशक्ति पूजा में रखिए और बाद में ही भेट दी जाए जिससे आपकी एवं अन्य व्यक्तियों की भी मनोकामना पूर्ण हो उपरोक्त विधि से व्रत करने से एवं विधिपूर्वक उद्यापन करने से निश्चित हो आपकी मनोकामना पूर्ण होगी ऐसा साईं भक्तो का विश्वास है

साईं व्रत कथा


कोकिला बहन और उनके पति महेशभाई शहर में रहते थे दोनों को एक-दुसरे के प्रति प्रेम-भाव था परन्तु महेशभाई का स्वाभाव झगडालू था बोलने की तमीज ही न थी आदोसी-पडोसी उनके स्वाभाव से परेशान थे, लेकिन कोकिला बहन बहुत ही धार्मिक स्त्री थी, भगवान पर विश्वास रखती एवं बिना कुछ कहे सब कुछ सह लेती धीरे-धीरे उनके पति का धंधा-रोजगार ठप हो गया कुछ भी कमाई नहीं होती थी महेशभाई अब दिन-भर घर पर ही रहते और अब उन्होंने गलत राह पकड़ ली अब उनका स्वभाव पहले से भी अधिक चिडचिडा हो गया

दोपहर का समय था एक वृद्ध महाराज दरवाजे पर आकार खड़े हो गए चेहरे पर गजब का तेज था और आकर उन्होंने दल-चावल की मांग की कोकिला बहन ने दल-चावल दिये और दोनों हाथों से उस वृद्ध बाबा को नमस्कार किया, वृद्ध ने कहा साईं सुखी रखे कोकिला बहन ने कहा महाराज सुख कीमत में नहीं है और अपने दुखी जीवन का वर्णन किया

महाराज ने श्री साईं के व्रत के बारे में बताया ९ गुरूवार (फलाहार) या एक समय भोजन करना, हो सके तो बेटा साईं मंदिर जाना, घर पर साईं बाबा की ९ गुरूवार पूजा करना, साईं व्रत करना और विधि से उद्यापन करना भूखे को भोजन देना, साईं व्रत की किताबे ५, ११, २१ यथाशक्ति लोगों को भेट देना और इस तरह साईं व्रतका फैलाव करना साईबाबा तेरी सभी मनोकामना पूर्ण करता है, लेकिन साईबाबा पर अटूट श्रद्धा रखना जरुरी है धीरज रखनी चाहिए जो उपरोक्त विधि से व्रत और उद्यापन करेगा साईबाबा उनकी मनोकामना जरुर पूर्ण करेंगे

कोकिला बहन ने भी गुरुर्वार का व्रत लिया ९ वे गुरूवार को गरीबो को भोजन दिया सैव्रत की पुस्तके भेट दी उनके घर से झगडे दूर हुए घर में बहुत ही सुख शांति हो गई, जैसे महेशभाई का स्वाभाव ही बदल गया हो उनका धंधा-रोजगार फिर से चालू हो गया थोड़े समय में ही सुख समृधि बढ़ गई दोनों पति पत्नी सुखी जीवन बिताने लगे एक दिन कोकिला बहन के जेठ जेठानी सूरत से आए बातो बातो में उन्होंने बताया के उनके बच्चे पढाई नहीं करते परीक्षा में फ़ेल हो गए है कोकिला बहन ने ९ गुरूवार की महिमा बताई साईं बाबा के भक्ति से बच्चे अच्छी तरह अभ्यास कर पाएँगे लेकिन इसके लिए साईं बाबा पर विश्वास रखना ज़रूरी है साईं सबको सहायता करते है उनकी जेठानी ने व्रते की विधि बताने के लिए कहा कोकिला बहन ने कहा की ९ गुरूवार फलाहार करके अथवा एक समय भोजन करके यह व्रत किया जा सकता है और ९ गुरूवार तक हो सके तो साईं मंदिर के दर्शन के लिए जाने को कहा और यह कहा की

- यह व्रत स्त्री, पुरुष या बच्चे कोई भी कर सकते है ९ गुरूवार साईं फोटो की पूजा करना
- फूल चढाना, दीपक, अगरबत्ती अदि करना प्रसाद चढाना एवं साईं बाबा का स्मरण करना आरती करना अदि विधि बताई
- साईं व्रत कथा, साईं स्मरण, साईं चालीसा अदि का पात करना
- ९ वे गुरुवार को गरीबो को भोजन देना
- ९ वे गुरुवार यह साईं व्रत की किताबे अपने सगे-सम्बन्धी, अडोसी-पडोसी को भेट देना

सूरत से उनकी जेठानी का थोड़े दिनों में पत्र आया की उनके बच्चे साईं व्रत करने लगे है और बहुत अच्छे तरह से पढ़ते है उन्होंने भी व्रत किया था और व्रत की किताबे जेठ के ऑफिस में दे थी इस बारे में उन्होंने लिखा के उनके सहेली की बेटी शादी साईं व्रत करने से बहुत ही अच्छी जगह तै हो गई उनके पडोसी का गहेनो का डब्बा दम हो गया वह महीने के बाद गहनों का डिब्बा न जाने कोन वापस रख गया एसा अद्भुत चमत्कार हुआ था

कोकिला बहन ने साईं बाबा की महिमा महान है वह जान लिया था

हे साईं बाबा जैसे सभी लोगों पर प्रसन्न होते है, वैसे हम पर भी होना
.

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Please Note :

Dear readers,
I am compliling the list of all the sources of Sai Vrat which are available in this blog for ready reference of the devotees.Devotees can download the material of their choice just by clicking on the link in the list .
Shri Sai Vrat Katha Complete Book :
Scanned version of Sai Vrath Katha for download.

Following list is part of Sai Vrat Katha Book available in blog and more shall be added soon.
Devotees are also requested to forward any other source or material of Sai Vrat in other languages to me in my ID so that it can be posted in the blog for benefit of other devotees.Jai Sai Ram.


Disclaimer: Shirdi Sai Baba had never laid emphasis on fasting. A Devotee of Baba had started this vrat initially and the vrat has fulfilled many wishes .So its upto the readers discretion to observe this vrat or not.



logo© Shirdi Sai Baba Sai Babas Devotees Experiences Sai Baba Related all Details

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6 comments:

Anonymous said...

baba ji pls help me

Unknown on June 18, 2012 at 7:47 PM said...

Hey Sai Nathan baba jese aap ne un sub bhagto ka dukh dur kiya jo tere Dar pe aaye, wese hi hey Sai Nathan baba meri bhi ekcha puri karna, mei bhi tere dar pe khali jholi leke aaya hu, om sai, jai sai, jai jai sai.

Anonymous said...

please help me sai ram

Rupinder Kaur on July 24, 2012 at 7:23 AM said...

Om Sai Nathay Namah

Anonymous said...

thanks so much i am planning to start this vrat from tomorrow if sai baba wishes

Anonymous said...

om sai ram..pls help me.i don't want to loose my close heart person

Have any question? Feel free to ask.

~श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय~ श्री साई बाबा के ग्यारह वचन : १.जो शिरडी आएगा ,आपद दूर भगाएगा,२.चढ़े समाधी की सीढी पर ,पैर तले दुःख की पीढ़ी पर,३.त्याग शरीर चला जाऊंगा ,भक्त हेतु दौडा आऊंगा,४.मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पुरी आस५.मुझे सदा ही जीवत जानो ,अनुभव करो सत्य पहचानो,,६.मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताये ७.जैसा भाव रहे जिस मनका, वैसा रूप हुआ मेरे मनका,,८.भार तुम्हारा मुझ पर होगा ,वचन न मेरा झूठा होगा ९ आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर ,१०.मुझ में लीन वचन मन काया ,उसका ऋण न कभी चुकाया,११ .धन्य -धन्य व भक्त अनन्य ,मेरी शरण तज जिसे न अन्य~श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय~
Live Darshan Time 4 A M.To 11.15 P.M.(IST). Live Darshan Can Be Viewd Only In Internet Explorer.

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I feel I am like a river, having my own course, stream and flow but the final destiny is to be one with the boundless ocean of my Sathguru Shirdi Sai Baba.

Amidst all the worldly rituals I am performing,I do not dare to loose sight of my Sainath. He is the sole driving force, the guide and the Supreme master.

The strings of my life are in his hand,I am just a puppet at His Holy Feet.
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