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Tuesday, September 2, 2008

SAI GANAPATI WALLAPAPER FOR DOWNLOAD.

Share Author: Manisha.Rautela.Bisht on 7:06 PM
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Sairam Dear readers ,
On this auspicious day of Sri Ganesh Chaturthi I am Happy to share with my Sai friends beautiful Sai Ganesh Wallapapers created and sent by Sai devotee Shri Kouwshigan Ji from Sri Lanka who has been providing Sathguru Sai Baba blog with beautiful screen saver ,Shirdi Sai Baba Wallpaper and paitings from time to time.Thank you Kouwshigan ji.
On this great day I wish everyone a very Happy Ganesh Chaturthi ,may Sai Ganesh shower his blessings on one and all .I am posting Ganesh ji Aarti,Ganeshji Mantra ,108 Ganeshji Sahasranamavali and Ganeshji chalisa as requested by few Sai devotees .



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~ साई विनायकाय नमः~
Ganesh Mantra and Stuti.


वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजंबूफलसारभक्षितम्
उमासुतं शोकविनाशकारणं नमामि विघ्नेश्वरपादपङ्कजम्
सुमुखश्चैकदंतश्च कपिलो गजकर्णकः
लम्बोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः
द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि
विद्यारंभे विवाहे प्रवेशे निर्गमे तथा
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य जायते
शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्
प्रसन्नवदनं ध्यायेत् सर्वविघ्नोपशान्तये
मूषिकवाहन् मोदकहस्त चामरकर्ण विलंबित सूत्र
वामनरूप महेश्वरपुत्र विघ्नविनायक पाद नमस्ते


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श्री गणपति सहस्रनामावलि

Ganesha Sahasranamawali


गणपतये नमः

गणेश्वराय नमः

गणक्रीडाय नमः

गणनाथाय नमः

गणाधिपाय नमः

एकदंष्ट्राय नमः

वक्रतुण्डाय नमः

गजवक्त्राय नमः

मदोदराय नमः

लम्बोदराय नमः

धूम्रवर्णाय नमः

विकटाय नमः

विघ्ननायकाय नमः

सुमुखाय नमः

दुर्मुखाय नमः

बुद्धाय नमः

विघ्नराजाय नमः

गजाननाय नमः

भीमाय नमः

प्रमोदाय नमः

आनन्दाय नमः

सुरानन्दाय नमः

मदोत्कटाय नमः

हेरम्बाय नमः

शम्बराय नमः

शम्भवे नमः

लम्बकर्णाय नमः

महाबलाय नमः

नन्दनाय नमः

अलम्पटाय नमः

भीमाय नमः

मेघनादाय नमः

गणञ्जयाय नमः

विनायकाय नमः

विरूपाक्षाय नमः

धीराय नमः

शूराय नमः

वरप्रदाय नमः

महागणपतये नमः

बुद्धिप्रियाय नमः

क्षिप्रप्रसादनाय नमः

रुद्रप्रियाय नमः

गणाध्यक्षाय नमः

उमापुत्राय नमः

अघनाशनाय नमः

कुमारगुरवे नमः

ईशानपुत्राय नमः

मूषकवाहनाय नमः

सिद्धिप्रदाय नमः

सिद्धिपतये नमः

सिद्ध्यै नमः

सिद्धिविनायकाय नमः

विघ्नाय नमः

तुङ्गभुजाय नमः

सिंहवाहनाय नमः

मोहिनीप्रियाय नमः

कटिंकटाय नमः

राजपुत्राय नमः

शकलाय नमः

सम्मिताय नमः

अमिताय नमः

कूश्माण्डगणसम्भूताय नमः

दुर्जयाय नमः

धूर्जयाय नमः

अजयाय नमः

भूपतये नमः

भुवनेशाय नमः

भूतानां पतये नमः

अव्ययाय नमः

विश्वकर्त्रे नमः

विश्वमुखाय नमः

विश्वरूपाय नमः

निधये नमः

घृणये नमः

कवये नमः

कवीनामृषभाय नमः

ब्रह्मण्याय नमः

ब्रह्मणस्पतये नमः

ज्येष्ठराजाय नमः

निधिपतये नमः

निधिप्रियपतिप्रियाय नमः

हिरण्मयपुरान्तस्थाय नमः

सूर्यमण्डलमध्यगाय नमः

कराहतिध्वस्तसिन्धुसलिलाय नमः

पूषदन्तभृते नमः

उमाङ्गकेळिकुतुकिने नमः

मुक्तिदाय नमः

कुलपालकाय नमः

किरीटिने नमः

कुण्डलिने नमः

हारिणे नमः

वनमालिने नमः

मनोमयाय नमः

वैमुख्यहतदृश्यश्रियै नमः

पादाहत्याजितक्षितये नमः

सद्योजाताय नमः

स्वर्णभुजाय नमः

मेखलिने नमः

दुर्निमित्तहृते नमः

दुस्स्वप्नहृते नमः

प्रहसनाय नमः

गुणिने नमः

नादप्रतिष्ठिताय नमः

सुरूपाय नमः

सर्वनेत्राधिवासाय नमः

वीरासनाश्रयाय नमः

पीताम्बराय नमः

खड्गधराय नमः

खण्डेन्दुकृतशेखराय नमः

चित्राङ्कश्यामदशनाय नमः

फालचन्द्राय नमः

चतुर्भुजाय नमः

योगाधिपाय नमः

तारकस्थाय नमः

पुरुषाय नमः

गजकर्णकाय नमः

गणाधिराजाय नमः

विजयस्थिराय नमः

गणपतये नमः

ध्वजिने नमः

देवदेवाय नमः

स्मरप्राणदीपकाय नमः

वायुकीलकाय नमः

विपश्चिद्वरदाय नमः

नादाय नमः

नादभिन्नवलाहकाय नमः

वराहवदनाय नमः

मृत्युञ्जयाय नमः

व्याघ्राजिनाम्बराय नमः

इच्छाशक्तिधराय नमः

देवत्रात्रे नमः

दैत्यविमर्दनाय नमः

शम्भुवक्त्रोद्भवाय नमः

शम्भुकोपघ्ने नमः

शम्भुहास्यभुवे नमः

शम्भुतेजसे नमः

शिवाशोकहारिणे नमः

गौरीसुखावहाय नमः

उमाङ्गमलजाय नमः

गौरीतेजोभुवे नमः

स्वर्धुनीभवाय नमः

यज्ञकायाय नमः

महानादाय नमः

गिरिवर्ष्मणे नमः

शुभाननाय नमः

सर्वात्मने नमः

सर्वदेवात्मने नमः

ब्रह्ममूर्ध्ने नमः

ककुप्छ्रुतये नमः

ब्रह्माण्डकुम्भाय नमः

चिद्व्योमफालाय नमः

सत्यशिरोरुहाय नमः

जगज्जन्मलयोन्मेषनिमेषाय नमः

अग्न्यर्कसोमदृशे नमः

गिरीन्द्रैकरदाय नमः

धर्माय नमः

धर्मिष्ठाय नमः

सामबृंहिताय नमः

ग्रहर्क्षदशनाय नमः

वाणीजिह्वाय नमः

वासवनासिकाय नमः

कुलाचलांसाय नमः

सोमार्कघण्टाय नमः

रुद्रशिरोधराय नमः

नदीनदभुजाय नमः

सर्पाङ्गुळिकाय नमः

तारकानखाय नमः

भ्रूमध्यसंस्थितकराय नमः

ब्रह्मविद्यामदोत्कटाय नमः

व्योमनाभाय नमः

श्रीहृदयाय नमः

मेरुपृष्ठाय नमः

अर्णवोदराय नमः

कुक्षिस्थयक्षगन्धर्वरक्षः- किन्नरमानुषाय नमः



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श्री गणेश चालीसा

Shri Ganesha Chalisa




जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल

विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल

जय जय जय गणपति गणराजू मंगल भरण करण शुभ काजू

जै गजबदन सदन सुखदाता विश्व विनायक बुद्घि विधाता

वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन

राजत मणि मुक्तन उर माला स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला

पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं मोदक भोग सुगन्धित फूलं

सुन्दर पीताम्बर तन साजित चरण पादुका मुनि मन राजित

धनि शिवसुवन षडानन भ्राता गौरी ललन विश्व-विख्याता

ऋद्घि-सिद्घि तव चंवर सुधारे मूषक वाहन सोहत द्घारे

कहौ जन्म शुभ-कथा तुम्हारी अति शुचि पावन मंगलकारी

एक समय गिरिराज कुमारी पुत्र हेतु तप कीन्हो भारी

भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंच्यो तुम धरि द्घिज रुपा

अतिथि जानि कै गौरि सुखारी बहुविधि सेवा करी तुम्हारी

अति प्रसन्न है तुम वर दीन्हा मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा

मिलहि पुत्र तुहि, बुद्घि विशाला बिना गर्भ धारण, यहि काला

गणनायक, गुण ज्ञान निधाना पूजित प्रथम, रुप भगवाना

अस कहि अन्तर्धान रुप है पलना पर बालक स्वरुप है

बनि शिशु, रुदन जबहिं तुम ठाना लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना

सकल मगन, सुखमंगल गावहिं नभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं

शम्भु, उमा, बहु दान लुटावहिं सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं

लखि अति आनन्द मंगल साजा देखन भी आये शनि राजा

निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं बालक, देखन चाहत नाहीं

गिरिजा कछु मन भेद बढ़ायो उत्सव मोर, शनि तुहि भायो

कहन लगे शनि, मन सकुचा का करिहौ, शिशु मोहि दिखा

नहिं विश्वास, उमा उर भय शनि सों बालक देखन कहा

पडतहिं, शनि दृग कोण प्रकाशा बोलक सिर उड़ि गयो अकाशा

गिरिजा गिरीं विकल है धरणी सो दुख दशा गयो नहीं वरणी

हाहाकार मच्यो कैलाशा शनि कीन्हो लखि सुत को नाशा

तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो काटि चक्र सो गज शिर लाये

बालक के धड़ ऊपर धारयो प्राण, मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो

नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे प्रथम पूज्य बुद्घि निधि, वन दीन्हे

बुद्घि परीक्षा जब शिव कीन्हा पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा

चले षडानन, भरमि भुला रचे बैठ तुम बुद्घि उपा

चरण मातु-पितु के धर लीन्हें तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें

तुम्हरी महिमा बुद्घि बड़ा शेष सहसमुख सके गा

मैं मतिहीन मलीन दुखारी करहुं कौन विधि विनय तुम्हारी

भजत रामसुन्दर प्रभुदासा जग प्रयाग, ककरा, दर्वासा

अब प्रभु दया दीन पर कीजै अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै

दोहा


श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान

नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान

सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश

पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ति गणेश




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आरती श्री गणेश जी की


जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

एक दंत दयावंत, चार भुजाधारी

माथे पे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

हार चढ़ै, फूल चढ़ै और चढ़ै मेवा

लड्डुअन को भोग लगे, संत करे सेवा

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

दीनन की लाज राखो, शंभु सुतवारी

कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा

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~श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय~ श्री साई बाबा के ग्यारह वचन : १.जो शिरडी आएगा ,आपद दूर भगाएगा,२.चढ़े समाधी की सीढी पर ,पैर तले दुःख की पीढ़ी पर,३.त्याग शरीर चला जाऊंगा ,भक्त हेतु दौडा आऊंगा,४.मन में रखना द्रढ विश्वास, करे समाधी पुरी आस५.मुझे सदा ही जीवत जानो ,अनुभव करो सत्य पहचानो,,६.मेरी शरण आ खाली जाए, हो कोई तो मुझे बताये ७.जैसा भाव रहे जिस मनका, वैसा रूप हुआ मेरे मनका,,८.भार तुम्हारा मुझ पर होगा ,वचन न मेरा झूठा होगा ९ आ सहायता लो भरपूर, जो माँगा वो नही है दूर ,१०.मुझ में लीन वचन मन काया ,उसका ऋण न कभी चुकाया,११ .धन्य -धन्य व भक्त अनन्य ,मेरी शरण तज जिसे न अन्य~श्री सच्चिदानंद सदगुरू श्री साईनाथ महाराज की जय~
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I feel I am like a river, having my own course, stream and flow but the final destiny is to be one with the boundless ocean of my Sathguru Shirdi Sai Baba.

Amidst all the worldly rituals I am performing,I do not dare to loose sight of my Sainath. He is the sole driving force, the guide and the Supreme master.

The strings of my life are in his hand,I am just a puppet at His Holy Feet.
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